शुक्रवार, 11 अगस्त 2023
शुक्रवार, 28 अप्रैल 2023
बुधवार, 8 जून 2022
सरकार की शह पर शराब का कारोबार
माननीय मुख्यमंत्रीजी(राजस्थान सरकार),
विषय-राजस्थान में शराब बंदी के क्रम में-
हमने इससे पूर्व भी कई बार आपको एवं इससे पूर्व माननीय मुख्यमंत्री वसुन्धराजी को भी हमारे संपादकीय के माध्यम से समय-समय पर आगाह करते आ रहे हैं कि शराब ऐसा मादक पदार्थ है कि जिससे बनी बनाई गृहस्थी उजड़ती जा रही है। इसकी सबसे ज्यादा मार गृहणियों को ही भुगतनी पड़ रही है। घर में अशांति छा जाती है। शराबी व्यक्ति आये दिन घर में कोहराम मचाता रहता है। पति के मानसिक असंतुलन के साथ-साथ उनके स्वयं का मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। ऐसे शराबी व्यक्ति को ना किराये से मकान मिल सकता है, और ना ही नौकरी। उनके बच्चे कुपोषण का शिकार हो रहे हैं। एकल परिवार पर इसकी मार बड़ी घातक होती है। वहाँ उन्हें कोई समझाने-बुझाने वाला भी नहीं होता है। या तो पत्नी को फाँसी के फंदे पर झूलना पड़ता है या पति को या पूरे परिवार को। क्योंकि आजीविका के सारे रास्ते बंद हो जाते हैं। कभी-कभी तो शराबी व्यक्ति अपने इस व्यसन के कारण कितना ही कर्ज सिर पर चढ़ा लेता है। ये केवल नैतिकता का ही विषय नहीं है, बल्कि महिला बाल-कल्याण से संबधित विषय भी है।
आज तो इस नशे के रोग ने उच्च जाति के वर्गों को भी अपनी चपेट में ले लिया है। वे अपनी इज्जत बचाने के चक्कर में पुलिस के पास भी नहीं जा सकते, क्योंकि दूसरे ही दिन सरे आम समाचार पत्रों में अपने परिवार की इज्जत नीलाम हो जाती है। वे बेचारी आखिर फरियाद करे भी तो किससे करे? पुलिस वालों के भी हाथ बंधे हुए हैं। वे एक तरफ नशा मुक्ति अभियान चलाते हैं, दूसरी तरफ सरकारें शराब की दुकानों के लाटरी के नाम से आवंटन पर एक-एक शराब केन्द्रों से 1-1 करोड़ के लगभग अवैध धन इकट्ठा कर रही है। चाहे किसी का घर बार्बाद हो जाये, चाहे शराब के कारण कोई रोड़ एक्सीडेन्ट में मर जाये, सरकारें चुप्पी साधे हुए हैं। आपकी ही सरकार में ऐसे-ऐसे मंत्री हैं, जो शराब की वकालात करते देखे जाते रहे हैं। फिर जनता के प्रति आपकी संवेदना कैसी? ये वे ही मंत्री हो सकते हैं, जो स्वयं शराब के आदी हों, अन्यथा ऐसे वक्तव्य एक जनप्रतिनिधि के मुख से निकलना अस्वाभाविक हैं या हो सकता है कि वे आपको शराब के मामले में मतिभ्रम कर रहे हो। आपके पास बड़े-बड़े राजनायिक, बड़े-बड़े अफसर, एवं कई स्वयं सेवी संस्थाएँ हैं, जिनके माध्यम से भी आप जानकारी ले सकते हैं कि क्या शराब वाकई सही है? हम केवल यह पूछना चाह रहे हैं कि कोई भी माता-पिता अपने बच्चे को शराब पीने की प्रेरणा दे सकता है? या अन्य कोई मादक पदार्थ बच्चें के खाने-पीने से माता-पिता खुश हो सकते हैं? यदि नहीं तो फिर आप जैसे मुख्यमंत्री(राजा) पद पर विराजमान होकर जनता में अपनी छवि क्यों खराब कर रहे हैं? इससे अच्छा तो आपके समय में कोरोना काल ही था, तब चारों ओर पुलिस का पुख्ता बंदोबस्त था। नशे के कारोबार पर एकदम जाम लग गया था। कोई अपराधी इधर से उधर नहीं जा सकता था। शराब को तो छोडिय़े, बीड़ी-सिगरेट, जरदा तंबाकू गुटका तक मिलना बंद हो चुका था। यदि कोई चोरी-छिपे लाकर मंहगे दाम पर भी बेचता हुआ दिखाई देता तो उस पर छापा पडऩा निश्चित था। हम यह नहीं कहते कि पुन: कोरोना काल की स्थिति बने, परंतु इस नशे के कारेबार पर अंकुश लगाना लाजिमी है।
ऐसा भी नहीं कि अन्य राज्यों में प्रतिबंध नहीं लगा हो। स्वयं प्रधानमंत्री मोदीजी के गृहराज्य गुजरात में सर्वप्रथम प्रतिबंध लगा है, इसके साथ ही नागालैंड, मिजोरम एवं बिहार जैसे राज्यों में शराब पर पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है। महाराष्ट्र के वर्धा जिले में महात्मा गाँधी की कर्म भूमि होने के कारण बहुत समय से शराब प्रतिबंधित है। हाल ही बिहार में नितीश सरकार ने कहा है कि कोई भी परिजन शराबी व्यक्ति की सूचना मुहैया करावे, हम उससे जाँच-पड़ताल कर जहाँ से शराब की बिक्री हो रही है, वहाँ छापे मारकर उस गिरोह का पर्दापाश करेंगे। ऐसा भी नहीं है कि जिन राज्यों में शराब पर प्रतिबंध लगा हुआ है, उस राज्य की स्थिति आर्थिक रूप से डाँवाडोल हो रही हो। हम यह भी नहीं कह सकते कि वहाँ शराब की तस्करी न हो रही हो, पर कम से कम वहाँ परिजन उस शराबी व्यक्ति के बारे में शिकायत दर्ज करवा तो सकता है, क्योंकि वहाँ के कानून में शराब प्रतिबंधित हैं। पर राजस्थान में परिजन कहे तो किससे कहे, यहाँ तक सरकारें स्वयं ही शराब के प्रचलन से पैसा कमा रही है। धिक्कार है ऐसे अवैध कमाई पर।
एक तरफ आप 'मुख्यमंत्री निशुल्क दवाइयाँ उपलब्ध करा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर राजस्थान में शराब का प्रचार-प्रसार हो रहा है। आये दिन समाचार पत्रों में देखने को मिलता है कि शराब से राज्य को कितना राजस्व प्राप्त हुआ। यह तो स्पष्टत: जनता की हत्या है। जनता भले ही मरे, अपना क्या? आज स्थिति यह है कि एक-एक शराब की दुकानें पाँच-पाँच दुकानों के माध्यम से शराब की बिक्री कर रही है और वे बेचारे करे भी तो क्या करे? उन्होंने करोड़ों रुपये देकर दुकानों के ठेके छुड़ाये हैं। उन्हें अपनी रकम वसूलने के साथ कुछ कमाई भी अर्जित करनी है। आज शराब के कारण किसी की किडनी फेल हो रही है तो किसी का लीवर डेमेज हो रहा है, कोई पागलपन का शिकार हो रहा है तो किसी की पत्नी भग रही है। क्या आप भी ऐसा ही चाहते हैं?
एक जमाना था, जब गाँवों-कस्बे में शराब की इनी-गिनी ही दुकाने थी, वे भी मुहल्ले से दूर किसी ओट में, जहाँ सभ्य व्यक्ति तो जाने की हिमाकत ही नहीं कर पाता था। आज हर राजमार्ग पर, मुहल्ले के बीचों-बीच, विद्यालयों के समीप खुले में शराब बिक रही है, कोई प्रतिबंध नहीं है। उस रास्ते पर चलना औरतों के लिए दुश्वार हो गया है। छोटे-छोटे बच्चों के कोमल दिल पर ऐसी कुप्रथा की छाप छूटती जा रही है। ऐसा भी देखा गया है कि अक्सर चुनावों के समय इसकी बहुत बड़ी खेप रेवडिय़ों की भाँति वितरण की जाती रही है। यद्यपि चुनाव अधिकारियों की सतर्कता से कई बार ये गिरोह पकड़े भी जाते रहे हैं।
आपसे गुजारिश है कि अन्य राज्यों की भाँति राजस्थान में भी शराब पर पूर्ण पाबंदी लगाई जानी चाहिए, जिससे आने वाली पीढ़ी की ऊर्जा को हम सही रास्ते पर लगा सकें। नशा कैसा ही हो, सभी मादक पदार्थ-जैसे भांग, गांजा, बीड़ी-सिगरेट, तंबाकू, गुटकें आदि ऐसे जानलेवा पदार्थ है, जिससे व्यक्ति अपना संतुलन खो देता है तथा यह कैंसर जैसी असाध्य बीमारियों की चपेट में आ जाता है। यदि समय रहते हम इन व्यसनों पर पाबंदी नहीं लगा सकते तो केवल पछताने के सिवा कुछ भी नहीं बचेगा। आपके प्रति जनता का विश्वास कम होता जा रहा है, क्योंकि जनता के प्रति आपकी जवाबदेयी अधिक है। ऐसे मंत्री जो ऐसे व्यसनों के प्रति ज्यादा वकालात करते हैं, उन्हें तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिए। अभी हाल ही में पंजाब के मुख्यमंत्री ने मात्र एक प्रतिशत कमीशन खाने पर एक मंत्री को बर्खास्त कर जनता के प्रति 'आप' पार्टी लोकप्रियता में चार चांद लगा दिये थे। आप तो स्वयं एक जानेमाने राजनैतिक जादूगर रहे हैं, फिर इस काम में देरी क्यों? मैं तो यह कहूंगा कि नशे पर पूर्ण प्रतिबंध लगाकर आबकारी विभाग को ही किसी अन्य विभाग में मर्ज कर दिया जाये, ताकि न रहे बाँस और न बजे बाँसुरी। ऐसी अवैध कमाई कल्याणकारी राज्यों के लिए उचित भी नहीं है।
हमें आशा है, आप जनता का मर्ज समझेंगे और शीघ्रतिशीघ्र शराब बंदी पर राज्य में एक कानून पास करवायेंगे, जिससे प्रेरणा पाकर अन्य राज्य भी आपका अनुकरण कर सकें और राजस्थान का नाम महिमा मंडित हो, साथ ही नीचे के पायदान पर खड़ी कांग्रेस की लोकप्रियता में कुछ अभिवृद्धि हो। हम मानते हैं कि आपकी वृद्ध व्यक्तियों के प्रति संवेदना रही है। माता-पिताओं के प्रति भी आपका दृष्टिकोण उदारवादी दिखता रहा है, पर शराब के कारण उन्हीं माता-पिताओं के सपने चकनाचूर हो रहे हैं, जिस पर आपका ध्यान अभी तक शायद नहीं पहुँच पा रहा है। यह मासिक पत्रिका आपके विभाग में भी पत्रिका के प्रारंभ से ही पहुँच रही है। हो सकता है आपको पढऩे का समय मिलता हो या नहीं, लेकिन ऐसे समाचार जो राज्यों एवं मुख्यमंत्री से संबंधित हो, आपके अफसरों द्वारा ध्यान में लाये जाने चाहिए। साथ ही प्रत्युत्तर में आपके द्वारा उन समाचार पत्रों को कुछ टिप्पणी भी भेजी जानी चाहिए, जिससे संवाद कायम हो सकें एवं पत्र-पत्रिकाओं का मनोबल बढ़ सकें। हो सकता है, शराब बंदी के उन्मूलन में कैसी भी बाधा हो, पर दृढ़ निश्चय के बल पर उस पर विजय पाई जा सकती है।
अपनी प्रतिक्रया अवश्य लिखें व दूसरों को भी शेयर करें। आपका अपना
महावीर प्रसाद शर्मा
(जून, 2022 के सम्पादकीय से)
सोमवार, 18 अप्रैल 2022
शुक्रवार, 4 मार्च 2022
रविवार, 6 फ़रवरी 2022
शनिवार, 5 फ़रवरी 2022
रविवार, 28 नवंबर 2021
गुरुवार, 4 नवंबर 2021
रविवार, 3 अक्टूबर 2021
रविवार, 19 सितंबर 2021
गुरुवार, 29 जुलाई 2021
बुधवार, 21 जुलाई 2021
बॉयोडाटा अपडेट
विकास जोशी/दिनेश जोशी, जन्म 29.09.1994, योग्यता-एम.ए., वर्तमान कार्य-मेडीकल स्टॉफ, शाखाएँ-इनाणिया, जाजोदिया, कुदाल, कुंंभ्या, संपर्क: मूल निवास नासरदा हाल कालिंजर गेट, शाहपुरा(भीलवाड़ा) मो. 9928189062
शुभम जोशी/दिनेश जोशी, जन्म 03.09.1992, योग्यता-12वीं, वर्तमान कार्य-मेडीकल स्टॉफ, शाखाएँ-इनाणिया, जाजोदिया, कुदाल, कुंंभ्या, संपर्क: मूल निवास नासरदा हाल कालिंजर गेट, शाहपुरा(भीलवाड़ा) मो. 9928189062
नरोत्तम दाधीच(सूर्य प्रकाश दाधीच)/स्व.श्री शंभू दयाल दाधीच, जन्म 22.1.1995, योग्यता-डबल बी.कॉम, वर्तमान कार्य-एच.डी.एफ.सी. बैंक में सेल्स एग्जेकेटिव ऑफिसर, शाखाएँ-पेडवाल पुरोहित, आचार्य डोबा, करेशिया, रतावा, संपर्क: मूल निवास सांवतगढ़(बूंदी) हाल मुकाम कोटा मो. 9636259295
हर्ष व्यास/स्व.श्री श्याम व्यास, जन्म 19.2.1997, योग्यता-बी.कॉम, वर्तमान कार्य-फायनेन्सियल एकाउन्टंट, शाखाएँ-रतावा, गोठड़ीवाल, संपर्क: उज्जैन(म. प्र.) मो. 9993175407
श्यामसुन्दर/श्री महेन्द्र कुमार दाधीच, जन्म 29.9.1992, योग्यता-बी.ए. एफ., आर.एस.सी.आई.टी.पायल्स में वेटेनेरी कम्पाउडर डिप्लोमा, वर्तमान कार्य-एच.डी.एफ.सी. बैंक में पर्सनल लरेन व दधिमथी टाईल्स का कार्य, शाखाएँ-करेशिया, सूंठवाल़, संपर्क: फतेहगढ़-केकड़ी(अजमेर) मो. 8107928600
आनंद शर्मा/रमेश चंद शर्मा जन्म 16.01.1986, योग्यता-बी.कॉम., एम.बी.ए.,सी.एफ.ए., वर्तमान कार्य-सिटी बैंक देहली में मैनेजर शाखाएँ-भेड़ा, इटोदिया संपर्क: भीलवाड़ा मो. 9413768172
इनाणिया, जाजोदिया साखों वाले, 29 वर्षीय, एम टेक, सेवारत संस्कारी युवक हेतु सुशील वधु अपेक्षित है। संपर्क: 9829577791
जितेन्द्र/श्री रामदयाल दाधीच, जन्म 31.10.1994, योग्यता-सी.ए., शाखाएँ-रतावा, पेडवाल पुरोहित,करेशिया, डीडवानिया तिवारी संपर्क: टोंक मो. 9785344218
नीरज/श्री चन्द्र प्रकाश शर्मा, जन्म 21.8.1991, योग्यता-बी.टेक, इलेक्ट्रोनिक्स इंजीनियर, वर्तमान कार्य-2018 से इंजीनियर, शाखाएँ-रोलाण्या, खटोड़, संपर्क: कोटा मो. 9950876347
निखिलेश ओझा/श्री स्व. बी.एम. ओझा, जन्म 19.3.1979, योग्यता-एम.बी.ए. वर्तमान कार्य-राजकीय क्लर्क उदयपुर में , शाखाएँ-कूलवाल, कुदाल, संपर्क: उदयपुर मो. 9971433667
सुनिल शर्मा/श्री लक्ष्मीनारायण शर्मा, जन्म 6.11.1986, ऊँचाई 5*9 योग्यता-बी.कॉम., सी.ए. वर्तमान कार्य-आदित्य बिरला में मैनेजर,, शाखाएँ-मांडोल्या, झुनझुनोदिया, संपर्क: किशनगढ़(अजमेर) मो. 9252529266, 9252146555,
राजेश शर्मा/श्री कैलाश चंद, जन्म 2.9.1981, योग्यता-एम.ए.,वर्तमान कार्य-भारतीय रेलवे में एकाउन्ट क्लर्क , शाखाएँ-मांडोल्या, गोठेचा, संपर्क: अजमेर मो. 9251269700
रतावा, चीपड़ा साखों वाले 23.5.88 एम.कॉम एम.एस.डबल्यू बी.एड संस्कार युवक हेतु सुशील वधु अपेक्षित है मो. 8769248182
संदीप शर्मा/श्री महावीर प्रसाद शर्र्मा, जन्म 4.7.1990, योग्यता-एम.बी.ए.सेल्स एवं माके्रटिंग,वर्तमान कार्य-मैनेजर हुंडई मोटर इंडिया लि. पैकेज 15 लाख(गुवाहाटी) , शाखाएँ-इटोदिया, मोल्यासी, संपर्क: गोहाटी(असम) मो. 9864450644 निसंतान, तलाकशुदा
करण दाधीच/विष्णुदत्त शर्र्मा, जन्म 24.7.1995, योग्यता-एम.ए.संस्कृत, एम.बी.ए.,वर्तमान कार्य-सेमसंग प्राईवेट लि. मे 25000 मासिक, शाखाएँ-रिणवा, कंठ तिवारी, संपर्क: अजमेर, मो. 7023741449, 8955913018 मांगलिक
कृष्ण कुमार शर्मा/नरेन्द्र कुमार शर्मा, जन्म 7.7.1994, योग्यता-एम.ए., बी.एड., एल.एल.बी.,वर्तमान कार्य-वकालात, शाखाएँ-नामावाल, पलोड, कासल्या, पथानिया, संपर्क: अंशल, सुंशांत सिटी(भीलवाड़ा), मो. 9928369008
कृष्ण मुरारी दाधीच/तेजमल दाधीच, जन्म 15.01.1991, योग्यता-एम.ए., बी.एड., वर्तमान कार्य-राजकीय वरिष्ठ अध्यापक, शाखाएँ-डीडवानिया,बडाढरा, कांकड़ा, संपर्क: राजगढ़(कोटा), मो. 7878365715
संदीप कुमार भट्ट/श्याम लाल भट्ट, जन्म 01.09.1986, योग्यता-एम.ए., बी.एड., वर्तमान कार्य-राजकीय अध्यापक, शाखाएँ-कुदाल, डिरोलिया, संपर्क: भीलवाड़ा, मो. 9414676759
भूपेन्द्र दाधीच/स्व. श्री शिवराज दाधीच, जन्म 15.10.1983, वर्तमान कार्य-जलदाय विभाग में राजकीय सेवा, शाखाएँ-पेड़वाल पुरोहित, खटोड़, संपर्क: खरली फाटक, कोटा मो. 9784073081, 8619485830
तलाकशुदा
नारायण दाधीच/ नन्दलाल दाधीच, जन्म 31.12.1984, योग्यता-बी.एड-हिन्दी, संस्कृत वर्तमान कार्य-ज्योतिष कार्य, शाखाएँ-खटोड़ व्यास, इनाणी, संपर्क: आमेट-राजसमंद मो. 9929315575
विधुर एवं एक पंचवर्षीय पुत्र के लिए अपेक्षित वधु
आयुष दाधीच/ दिनेश कुमार शर्मा, जन्म 19.11.1993, योग्यता-चार्टेड एकाउन्ट वर्तमान कार्य-सीनियर एनालिसिस एट रॉयल बैंक ऑफ स्कॉटलैंड(मुंबई)शाखाएँ-डेरालिया, कोलिवाल, संपर्क: शास्त्री कॉलोनी, अजमेर मो. 9829119559
शैलेन्द्र तिवारी/ ओम नारायण तिवारी, जन्म 21.1.1999, योग्यता-रेफ्रिजरेटर एवं कंडीशनिंग में आईटीआई, वर्तमान कार्य-श्री राम इंडस्ट्री सुपरवायजर,शाखाएँ-जाटल्या तिवारी, मांडोल्या, नुवाल, बोरायड़ा व्यास, संपर्क: अजमेर मो. 9828732559
मनीष दाधीच/ बालकिशन दाधीच, जन्म 17.6.1992, योग्यता-12वीं, कंप्यूटर डिप्लोमा वर्तमान कार्य-श्री सीमेंट लिमिटेड रास,शाखाएँ-सूंठवाल, बोरायड़ा व्यास, कूकड़ा, रिणवा,संपर्क: ब्यावर(अजमेर) मो. 8107129729
नितेश शर्मा/ ओम प्रकाश शर्मा, जन्म 19.07.89, योग्यता-बी.टेक कंप्यूटर साइंस वर्तमान कार्य-अलाईड इंश्योरेंस, मुंबई,शाखाएँ-कंठ, कुदाल, संपर्क: अजमेर मो. 9460932866, 9137406307
चंद्र प्रकाश जोशी/ केैलाश चंद्र जोशी, जन्म 17.11.95, योग्यता-बी.कॉम. बी.एस.टी.सी, कंप्यूटर हार्डवेयर डिप्लोमा, शाखाएँ-पथानिया, सूंठवाल, अवार्डिंग खटोड़, संपर्क: मनोहरपुरा (अजमेर)मो. 9928250005
आशीष कुमार जोशी/ केैलाश चंद्र जोशी, जन्म 12.09.97, योग्यता-बी.ए. फाईनल, शाखाएँ-पथानिया, सूंठवाल, अवार्डिंग खटोड़, संपर्क: मनोहरपुरा (अजमेर)मो. 9928250005
ओमप्रकाश(भावेश)/ लोकेश व्यास, जन्म 18.6.93, योग्यता-एम.कॉम. रीट की तैयारी, शाखाएँ-रिणवा,कासलिया भट्ट, काकड़, संपर्क: सरगाँव (भीलवाड़ा)मो. 9602315406
मनीष कुमार दाधीच/राजेन्द्र कुमार दाधीच, जन्म 11.6.97, योग्यता-बी.ए. बी.एस.टी.सी. वर्तमान कार्य-रीट की तैयारी, शाखाएँ-लालोदिया,ईनाणी, भेड़ा संपर्क: कोशिथल (भीलवाड़ा)मो. 9660605675
शुभम शर्मा/अश्विनी शर्मा, जन्म 31.7.96, ऊँचाई-5Ó9 फिट, योग्यता-बी.टेक.कंम्प्यूटर, वर्तमान कार्य-सोफ्टवेयर इंजीनियर पुणे, शाखाएँ-गादिया व्यास, पलोड, कांकड़ा, सूंठवाल, संपर्क: भटिंडा-पंजाब (मूल निवास-जोधपुर)मो. 7696211847, 7696148708
राजेन्द्र/रामकरण दाधीच, जन्म 5.7.94, योग्यता-आठवीं पास, वर्तमान कार्य-आदर्श विद्यालय में मिठाई का कार्य, शाखाएँ-रतावा, चीपड़ा, संपर्क: मूल गाँव बासनी कछुवा-मेड़ता सिटी, औरंगाबाद(महाराष्ट्र)मो. 6375893246
श्यामसुन्दर दाधीच/महेन्द्र कुमार दाधीच, जन्म 19.9.92, योग्यता-बी.ए. आर.एस.सी.आई.टी. वेटेनिरी कम्पाउडर डिप्लोमा, वर्तमान कार्य-मालपुरा में एच डी.एफ.सी. बैंक में फायनेंसर, शाखाएँ-करेशिया, सूंठवाल, डोबा, ओझा संपर्क: फतहगढ़-सरवाड़ (अजमेर)मो. 8107928600
योगेश्र/ सत्यनारायण शर्मा, जन्म 1.7.93 योग्यता-मैकेनिक पोलेटेक्रिक आई.टी.आई, शाखाएँ-ईनाणिया व्यास, डीडवानिया तिवाड़ी, रतावा संपर्क: देवरिया-फूलिया कलां हाल मुकाम गुलाबपुरा(भीलवाड़ा) मो. 9828943266
अरुण दाधीच/ स्व.गोविन्द प्रसाद दाधीच, जन्म 27.06.94, योग्यता-बी.कॉम., वर्तमान कार्य-पेंटस एण्ड कैमिकल्स यान एण्ड फैब्रिक शाखाएँ-शाडिल्य, गोठडीव०ाल, रतावा, संपर्क: (मूलगाँव-खींवसर गाँव भावंडा-नागौर)कोयम्बटूर-तमिलनाडू मो. 9345621068
जितेन्द्र/ स्व.गोविन्द प्रसाद दाधीच, जन्म 27.11.96, योग्यता-12वीं, वर्तमान कार्य-पेंटस एण्ड कैमिकल्स यान एण्ड फैब्रिक शाखाएँ-शाडिल्य, गोठडीवाल, रतावा, (मूलगाँव-खींवसर गाँव भावंडा-नागौर) संपर्क: कोयम्बटूर-तमिलनाडू मो. 9345621068
मयंक जोशी/गोपाल लाल जोशी (आयुर्वेद चिकित्सक), जन्म 18.5.93, योग्यता-बी.टेक, सी.डेक, कंप्यूटर साइंस, सोफ्टवेयर इंजीनियर पद पर कार्यरत, वर्तमान कार्य-गांधीनगर-गुजरात में सोफ्टवेयर इंजीनियरिंग, शाखाएँ-रतावा, जाजोदिया, जाटल्या, संपर्क: गुलाबपुरा मो. 9414572761 एकाउन्ट नं. 4789 (अगस्त से नवम्बर, 2020 तक)
महेंद्र/कैलाश शर्मा, डेरोलिया व्यास, पाराशरिया 26 वर्ष, बी. टेक.,सर्विस (हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड) उदयपुर
चित्तौडग़ढ़। संपर्क 88247 99355
सोहन दाधीच/स्व. सुरेश कुमार दाधीच, जन्म-09.05.91 योग्यता-बी.टेक सिविल इंजीनियर वर्तमान कार्य-प्राजेक्ट मैनेजर, पुणे-महाराष्ट्र में कार्यरत, शाखाएँ: कोत्स, गोठेचा, सांडिल्य, रिणवा, संपर्क-जयपुर मो. 9001845385 एकाउन्ट 4803 (अप्रेल, 20 से जुलाई 20 तक)
राजेन्द्र/रामकरण जन्म-05.07.94 योग्यता-एम.बी.ए., एस.आर.एम. यूनिवर्सिटी चैन्नई, वर्तमान कार्य-अमेजन कंपनी चैन्नई में एसोसिएट पद पर कार्यरत, शाखाएँ: खटोड़ व्यास, ल्याली, इटोदिया जोशी संपर्क-भीम(राजसंमद) मो. 6375893246 एकाउन्ट 4803 (अप्रेल, 20 से जुलाई 20 तक)
गजेन्द्र कुमार/गिरिराज प्रारद दाधीच, जन्म-12.7.89 योग्यता-बी.ए., एल.एल.बी में प्रवेश, वर्तमान कार्य-स्टांप टाइपिंग का कार्य, दीगोद शाखाएँ: सोलंग्या पुरोहित, डीडवानिया तिवाड़ी, कुभिया जोशी, संपर्क-सुल्तानपुर-दीगोद(कोटा) मो. 9950640281 एकाउन्ट 5066 (अप्रेल, 20 से जुलाई 20 तक)
सुनिल/भगवान लाल जोशी, जन्म-13.6.89 योग्यता-एम.ए., बी.पी.एड.पत्रकारिता में डिप्लोमा, फायर एण्ड सेफ्टी में डिप्लोमा, वर्तमान कार्य-दैनिक भास्कर में प्रेस रिपोर्टर भीलवाड़ा शाखाएँ: जिजलोदिया, इनाणी संपर्क-धमाना-कपासन(चित्तौडग़ढ़) मो. 9799984170 एकाउन्ट 4742 (मार्च, 20 से जून 20 तक) परित्यक्त
गिरिराज दाधीच/भँवर लाल मिश्रा, जन्म 4.12.1989 वर्ष, शैक्षणिक योग्यता-बी.टेक. इलेक्ट्रीकल वर्तमान कार्य-जयपुर मेट्रो में (जे.ई.एन.)राजकीय सेवा, शाखाएँ-सिंहलोदिया, पलोड, जाटल्या तिवाड़ी, सूंठवाल, संपर्क: दूदू (जयपुर) मो. 9829636107 एकाउन्ट 4627 (मार्च, 20 से जून, 20 तक)
कुदाल, कोलीवाल साखों वाले 40 वर्षीय एम.बी.ए. राजकीय सेवा (एल.डी.सी.) युवक हेतु उदयपुर में साधारण परिवार की वधु अपेक्षित है। मो. 9971433667
(फरवरी, 20 से मई, 2020 तक) तलाकशुदा
दिनेश चंद/प्रकाश चंद दाधीच, जन्म 16.11.1993 वर्ष, शैक्षणिक योग्यता-एम.कॉम वर्तमान कार्य-ब्रांच मैनेजर फिनोवा कैपिटल प्राईवेट लि., शाखाएँ- रिणवा, बगडिय़ा, डिरोलिया, काकड़ा,
संपर्क: रजवास-निवाई (टोंक) मो. 9079395178 एकाउन्ट 5037
(जनवरी, 20 से अप्रेल, 20 तक)
पंकज /राम प्रसाद शर्र्मा, जन्म 25.11.1993 वर्ष, शैक्षणिक योग्यता-एम.एस.सी. फिजिक्स, बी.एड वर्तमान कार्य-व्याख्याता, भौतिक शास्त्र की तैयारी जयपुर में , शाखाएँ-खटोड, मालोदिया, रोलाणिया, ड़मानिया, संपर्क: अराई(अजमेर) मो. 9610173638
एकाउन्ट 3301 (जनवरी, 20 से अप्रेल, 20 तक)
ब्रजेश कुमार /सत्यनारायण शर्मा, जन्म 23.01.1995 वर्ष, शैक्षणिक योग्यता-बी.टेक. वर्तमान कार्य-लेब असिस्टेंट, शाखाएँ-चीपड़ा, ओझा, संपर्क: कोठिया(भीलवाड़ा) मो. 9602255602
एकाउन्ट 3437 (दिसम्बर,19 से मार्च 20 तक)
अरविन्द कुमार (एडवोकेट)/राधेगोपाल दाधीच, जन्म 07.12.1986 वर्ष, शैक्षणिक योग्यता-बी.ए., एम.बी.ए., एल.एल.बी. वर्तमान कार्य-वकालात, शाखाएँ-डेरोलिया, पोलगला, रतावा
संपर्क: देवली (टोंक) मो. 9413960746 एकाउन्ट 5000
(दिसम्बर,19 से मार्च 20 तक)
मोहित कुमार/हनुमान प्रसाद, जन्म 11.8.1991 वर्ष, शैक्षणिक योग्यता-बी.एस. सी., आई.एम.एस., वर्तमान कार्य-एलबम डिजायनिंग, फोटो मिक्सिंग (स्वयं की दुकान), शाखाएँ-करेशिया पंचोली, बोरायड़ा , खटोड़, कुंभ्या संपर्क: तबीजी (अजमेर)
मो. 9461618815 एकाउन्ट 4804
(अक्टूबर, 19 से जनवरी, 2020 तक)
नितेश/कृष्णगोपाल शर्मा, उम्र 8.4.86 योग्यता-एम. ए./बी.एड.,शिक्षा शास्त्री वर्तमान कार्य-कुचामन कॉलेज में अध्यापन, शाखाएँ-गोठेचा, मांडोल्या, संपर्क मदनगंज-किशनगढ़ (अजमेर) मो. 9214558107
एकाउन्ट-2792 (नवम्बर,19 से फरवरी, 2020 तक)
विकल्प मिश्रा/नन्दकिशोर मिश्रा, जन्म 26.1.91 वर्ष, शैक्षणिक योग्यता-बी.कॉम., एल.एल.बी., वर्तमान कार्य-एडवोकेट,
शाखाएँ-झुनझुनोदिया, कासल्या व्यास संपर्क: ब्यावर (अजमेर)
मो.9352662079 एकाउन्ट 2126 (नवम्बर,19 से फरवरी,2020 तक)
विजेन्द्र जोशी/श्यामलाल जोशी जन्म 20.11.1978 वर्ष, शैक्षणिक योग्यता-एम.बी.ए.,(एच.आर.) वर्तमान कार्य-प्राइवेट सेक्टर जयपुर में कार्यरत, शाखाएँ-सिंहलोदिया, रिणवा, आसोपा, कांकड़ा
संपर्क: गुलाबपुरा (भीलवाड़ा) मो.9414972208 एकाउन्ट 2775
(दिसम्बर,19 से मार्च 20 तक) परित्यक्त
टिंकू शर्मा/देवकृष्ण शर्मा, उम्र 27.10.1989 वर्ष, योग्यता-नर्सिंग वर्तमान कार्य-स्वयं का कार्य शाखाएँ-चीपड़ा, डीडवानिया तिवाड़ी, पलोड, डिरोलिया संपर्क-पंडेर (भीलवाड़ा)मो. 9468542027 एकाउन्ट-4828 (नवम्बर,19 से फरवरी, 20 तक)
खगेन्द्र दाधीच/महेश दाधीच, उम्र 24 वर्ष, योग्यता-बी.जे.एम.सी.,बी.कॉम., एम.जे.एम.सी. एम.कॉम वर्तमान कार्य-शिक्षक, पत्रकार, शाखाएँ-बहड़, पलोड संपर्क-डीडवाना (नागौर)
मो. 9828433551 एकाउन्ट-4987 (नवम्बर,19 से फरवरी,20 तक)
धर्मेन्द्र/स्व. शक्तिधर दाधीच, उम्र 30 वर्ष, योग्यता-10वींं, वर्तमान कार्य-पोस्ट ऑफिस में राजकीय सेवा, शाखाएँ-नुवाल आचार्य, पाटोदिया, जामवाल, बगडिय़ा संपर्क-अजमेर मो. 7891832332 एकाउन्ट-4969 (नवम्बर,19 से फरवरी, 20 तक)
आशुतोष/भँवर लाल दाधीच, उम्र 23.08.1995 वर्ष, योग्यता-बीटेकं, ई.सी.ई. वर्तमान कार्य-केपिटल एजुकेशन जयपुर,के.डी.केम्पस जींद हरियाणा शाखाएँ-आसोपा, सोलंकिया, संपर्क-अंता (बारां) मो. 9460004742 एकाउन्ट-4345 (नवम्बर,19 से फरवरी, 20 तक)
हिमांशु दाधीच/राजेन्द्र कुमार शर्मा, जन्म 27.8.92 वर्ष, शैक्षणिक योग्यता-एम कॉम, वर्तमान कार्य-असिस्टेंट बैंक मैनेजर (कर्नाटक विकास ग्रामीण बैंक), शाखाएँ-डीडवानिया तिवारी, बिसावा तिवारी, लालोदिया, नुवाल आचार्य, संपर्क: उदयपुर मो. 9460895957 एकाउन्ट 4945 (नवम्बर, 19 से फरवरी, 2020 तक)
राजकुमार/शिव प्रसाद, जन्म 1994 वर्ष, शैक्षणिक योग्यता-एम.कॉम., वर्तमान कार्य-एलबम डिजायनिंग, फोटो मिक्सिंग (स्वयं की दुकान), शाखाएँ-करेशिया पंचोली, झुनझनोदिया, खटोड़ व्यास, ल्याली, संपर्क: तबीजी (अजमेर) मो. 9461618815 एकाउन्ट 4804 (अक्टूबर, 19 से जनवरी, 2020 तक) तलाकशुदा
राहुल/रमेश चंद, जन्म 3.12.1992, योग्यता-बीकॉम, एमबीए वर्तमान कार्य-सीए में कार्यरत, शाखाएँ-चीपड़ा, सूंठवाल, इटोदिया,
संपर्क-विजयनगर (अजमेर) मो. 9460357424 एकाउन्ट-4937
(सितम्बर से दिसम्बर, 2019 तक)
अनुराग/रमेश चंद, जन्म 18.09.1991, योग्यता-एम.ए.पोलेटेक्रिक), वर्तमान कार्य-कंचन इंडिया मांडल में कार्यरत, शाखाएँ-चीपड़ा, सूंठवाल, इटोदिया, संपर्क-विजयनगर (अजमेर) मो. 9460357424 एकाउन्ट-4937 (सितम्बर से दिसम्बर, 2019 तक)
भानू प्रकाश दाधीच/रूपनारायण जन्म 11.8 1992 वर्ष, शैक्षणिक योग्यता-डबल एम.ए, कंप्यूटर इंजीनियर, वर्तमान कार्य-एच.डी.बैंक, शाखाएँ-सूंठवाल, बोरायड़ा व्यास संपर्क:अजमेर मो. 9829579700 एकाउन्ट 2288 (अगस्त,19 से नवम्बर 19 तक)
रमेशचन्द्र/कृष्णगोपाल शर्मा, उम्र 32 वर्ष, सैकेण्डरी पास, वर्तमान कार्य-दिल्ली में आईस्क्रीम का निजी व्यवसाय शाखाएँ-आसोपा,खटोड, कोलिवाल, संपर्क : महेनद्रगढ़ (भीलवाड़ा), मो. 9549985473 एकाउन्ट 4394 (जून,19 से सितम्बर 19 तक)
योगेश चंद शर्मा/शंकर लाल दाधीच, उम्र 37 वर्ष, शैक्षणिक योग्यता-एम.ए, बी.पी.एड. , वर्तमान कार्य-मेडीकल, आयुर्वैदिक,कॉस्मेटिक डिस्ट्रीब्यूटर मासिक आय-50 हजार, शाखाएँ-झुनझुनोदिया, कंठ तिवारी संपर्क: अजमेर मो. 9413224034 एकाउन्ट 4506 (अगस्त,19 से नवम्बर 19 तक)
श्यामसुन्दर/शकंरलाल जोशी जन्म जुलाई, 1993 वर्ष, शैक्षणिक योग्यता-एम.बी.ए.,एम.कॉम वर्तमान कार्य-भीलवाड़ा में अल्ट्राटेक सीमेन्ट में कार्यरत, शाखाएँ-खटोड़, नुवाल आचार्य संपर्क: गंगापुर (भीलवाड़ा) मो. 9413480409 एकाउन्ट 4357
(जुलाई,19 से अक्टूबर 19 तक)
राकेश/घनश्याम दाधीच, जन्म 1986 वर्ष, इलेक्ट्रिक एण्ड कम्यूनिकेशन डिप्लोमा, वर्तमान कार्य-दरीबा माइंस में इंजीनियरिंग पर पर कार्यरत शाखाएँ-पारासरिया, पेडवाल ओझा, चीपड़ा, जिजलोदिया संपर्क : पटोलिया(चित्तौडग़ढ़) मो. 9460833770 एकाउन्ट 2935 (जून,19 से सितम्बर 19 तक)
मुकेश/प्रेम नारायण, उम्र 11.11.1986 वर्ष, एम.ए./बीएड.इन इंगलिस, वर्तमान कार्य-भीलवाड़ा में ई मित्र, कंम्प्यूटर वर्क कान्ट्रेक्ट सभी प्राईवेट स्कूल शाखाएँ-बुड़सुवाणा, खटोड़ संपर्क : काचरिया-नान्दसी (अजमेर) मो. 9829912984
एकाउन्ट 4480 (जून,19 से सितम्बर 19 तक)
सौरभ/जगदीश प्रसाद दाधीच, उम्र 32 वर्ष, बी.एस.सी-मैथ्स, एल.एल.बी., वर्तमान कार्य-सरकारी बैंक में कैशियर शाखाएँ-इनाणी, ओझा पेडवाल संपर्क : केकड़ी (अजमेर) मो. 9887416229 एकाउन्ट 3455 (जून, 19 से सितम्बर 19 तक)
तलाकशुदा एवं निसंतान
मुकेश चन्द्र/शंकर लाल शर्मा, उम्र 40 वर्ष, एम.ए. बीएड., वर्तमान कार्य- कनिष्ठ लिपिक/पंचायत सहायक सचिव, शाखाएँ-नुवाल, आसोपा, सूँठवाल, संपर्क : गोरखिया (भीलवाड़ा)
मो. 9549985473 एकाउन्ट 4394 (जून,19 से सितम्बर19 तक)
राजेश/लादु लाल शर्मा, उम्र 2.7.89 वर्ष, बी.ए. हिन्दी वर्तमान कार्य-बैंक ऑफ बड़ौदा मिनी बैंक, प्रिटिंग प्रेस, फोटोग्राफी, स्टेशनरी स्टोर, फोटो स्टेट, विडियोग्राफी, ईमित्र आदि शाखाएँ-कुदाल तिवाड़ी, मांडोलिया, संपर्क : रोपा(भीलवाड़ा) मो. 9785362303 ए. 3245 (अप्रेल,19 से जून 19 तक)
बोरायड़ा, तिवाड़ी, ओझा पेडवाल साखों वाले/26 वर्षीय/5Ó11/बी.एस.सी., एल.एल.एम/जी.जे.एस. सिविल जज में चयनित युवक हेतु वधू अपेक्षित है संपर्क कुचेरा(नागौर) मो. 9928050067
वधू पक्ष
अन्नपूर्णा दाधीच/ भँवर लाल मिश्र्रा, जन्म 24.7.1992, योग्यता-सी.ए. वर्तमान कार्य-ऑडिट मैनेजर जयपुर, शाखाएँ-सिंहलोदिया, पलोड, जाटल्या तिवारी, सूंठवाल, संपर्क: दूदू-जयपुर मो. 9829636107, सी.ए. को प्राथमिकता
अपूर्वा दाधीच/ वासुदेव शर्मा, जन्म 13.12.93, योग्यता-बी कॉम, डिप्लोमा कॉमर्शियल आर्ट, मास्टर इन फाईन आर्ट, वर्तमान कार्य-प्रथम ग्रेड लेक्चरर की तैयारी, शाखाएँ-पाटोदिया, कांकड़ा, संपर्क: जयपुर मो. 9983292792, 8302474887
पूजा/ कैलाश शर्मा, डेरोलिया व्यास, पारासरिया, 21 वर्ष, बी.एड. सेकंड ईयर रनिंग। चित्तौडग़ढ़ मो0. 88247 99355
/ डी. के.शर्मा, जन्म 1998,ऊँचाई 5.7 फिट, योग्यता-बी.सी.ए., एम.बी.ए., वर्तमान कार्य, बैंक में कार्यरत, किशनगढ़़ (अजमेर) मो. 9929741551 अपेक्षित सरकारी नौकरी
अंकिता दाधीच/ श्याम दाधीच, जन्म 17.1.89, योग्यता-एम.ए. बी.एड., डिप्लोमा, वर्तमान कार्य-तृतीय श्रेणी अध्यापक, शाखाएँ-कंठ, पेडवाल पुरोहित, इटोदिया, सूंठवाल, संपर्क: बोरखेड़ा कोटा मो. 9928510845, 9602204949 तलाकशुदा
गुरुवार, 15 जुलाई 2021
वार्तालाप
जगनाथपुरी में समुद्र को हिलोरों में खूब गोते लगाकर, मैं अपनी बगड़िया धर्मशाला में लौट गया। यह राजस्थान की एकमात्र धर्मशाला थी। अधिकतर राजस्थानी ही इस धर्मशाला में रुकते थे। उत्तमचंद छड़ी वाला पुजारी अपने जजमानों को इसी धर्मशाला से ढूंढ-ढूंढ कर ले जाता था। मेरे वापसी को गाड़ी रात 9 बजे थी अभी 3-4 घंटे का समय था। धर्मशाला के बीचों-बीच एक मात्र था। वहाँ काफी देर देर से तकरीबन 20 वर्ष की एक लड़की गुमसुम बैठी हुई थी, शायद वह यहाँ के पुजारी की बेटी होगी। मैंने सोचा चलो, इससे बात ही की जाये, तब तक समय भी कट जायेगा।
मैंने पूछा-क्या तुम इसी मंदिर में रहती हो?
उसने कहा-नहीं, हम तो यहाँ घूमने आये हैं।
मैंने पूछा- तुम कहाँ से आई हो?
उसने कहा-मुरादाबाद(यू.पी.) से।
उसने पूछा- आप भी यहाँ घूमने आये हैं।
मैंने कहा-हाँ, हम राजस्थान से आये हैं।
मैंने पूछा - तुम्हारी जाति?
उसने कहा-हम धोबी है।
उसने पूछ-आप?
मैंने कहा-हम ब्राह्मण है, (पुत्र की ओर इशारा करते हुए मेरे साथ एक भैया भी है।
मैंने पूछा- तुम्हारे साथ और भी हैं?
उसने कहा-हम सात-आठ जने साथ हैं।
मैंने पूछ-तुम्हारे माता-पिता भी साथ हैं ?
उसने कहा-पिताजी को गुजरे सात-आठ वर्ष हो गये और मुरादाबाद में ही है।
(मेरी रूचि बढ़ रही थी, आखिर यह इतनी दूर किसके साथ आई है)
मैंने पूछा-यहाँ तुम्हारे परिवार के कौन-कौन साथ हैं?
उसने कहा-मैं मेरी दीदी के साथ आयी हूँ। मेरी दीदी के स्टॉफ वाले भी हमारे साथ हैं।
मैंने पूछा-क्या तुम्हारी दीदी कोई नौकरी करती है?
उसने कहा-हाँ, वह मेरे पिताजी की जगह हो लगी है।
मैंने पूछा-क्या तुम्हारे भाई नहीं हैं?
उसने कहा-नहीं, हम दो बहिनें ही हैं।
मैंने पूछा-पिताजी को क्या तकलीफ थी?
उसने कहा- उन्हें कैंसर था। (मैं बुदबुदा रहा था-राम, राम, राम भगवान बचाये कैंसर से)
मैंने पूछा-वे किस डिपार्टमेंट में थे?
उसने कहा-वे पुलिस में थे।
मैने कहा-इस डिपार्टमेंट में माँ को लगना चाहिए था।
उसने कहा-क्या करे, माँ कम पढ़ी-लिखी थी, चपरासी बनती। दीदी उस समय कॉलेज में पढ़ रही थी कॉन्सटेबल बन गई।
मैंने पूछा-दीदी की उम्र?
उसने कहा-लगभग 30-32 वर्ष।
मैंने पूछा-दीदी की शादी हो गई?
उसने कहा-वह शादो कैसे कर सकती है? पिताजी की जगह लगी है। हमारे घर का खर्चा वही उठाती है। माँ कहती है कि तेरी शादी भी वही करायेगी। (मेरे दिल में शूल चुभी, कैसे हैं ये लोग, अपनी सुकोमल पुत्रियों का समय पर विवाह तक नहीं करवा सके।)
मैंने कहा-तुम्हें तरस नहीं आता कि दीदी का भी परिवार होना चाहिए। आज उसके बच्चे होते तुम्हें मौसी व तुम्हारी माताजी को नानी कहकर पुकारते। तुम्हारी दीदी का भी मन लगा रहता।
मैंने पूछा-तुम्हारी उम्र?
उसने कहा-छब्बीस वर्ष।
फिर देर किस बात की। विवाह तो 18-20 वर्ष में ही हो जाना चाहिए। मैं तो सोच रहा था कि शायद तुम 18-20 वर्ष की होगी। (वह मौन हो गई, मानो दीदी की तकलीफ उसके दिल को छू गई।)
होना तो यह चाहिए था कि माँ सर्विस करती, बच्चियों का समय पर हाथ पीला करती। उनका परिवार होता। उसके भी पुत्र के समान जंवाईराज खड़े हो जाते।
चिन्तन-आज स्थिति ऐसी है कि अपने पुत्रों के छोटे होने के कारण अपने पति की मृत्युपरांत पति की जगह पली को सर्विस करनी पड़ती है और जब उनके पुत्र बड़े हो जाते हैं तो माँ को कमा-कमा कर उन बालिग पुत्रों का भरण-पोषण करना पड़ता है। क्या ऐसा नहीं हो सकता कि पुत्रों के बालिग होने पर माँ यदि चाहे तो परिवार में से किसी एक पुत्र को उसकी जगह पुनः नौकरी लगा ली जाये तो माँ भी राहत की सांस ले सके तथा उस पुत्र को नौकरी लगने के कारण उसको समय पर शादी हो सके और वह अपना परिवार चला सकें।
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शुक्रवार, 9 जुलाई 2021
त्रिफला एक रामबाण औषधि (स्वास्थ्यपरक अनुभूत)
बढ़ती हुई उम्र के साथ मनुष्य पर कई व्याधियां आ सकती है। व्यक्ति सोचता है किसको दिखाएं, किससे इलाज करायें। वह सीधे डॉक्टर के पास ही जाता है, क्योंकि उसके सन्निकट ही ये औषधालय अटे पटे हैं, जबकि एलोपैथिक दवाओं के लेने से कई साईड इफेक्ट हो जाते हैं। व्यक्ति को भूल कर भी अंग्रेजी दवा का सेवन नहीं करना चाहिए। ये दवाएं मनुष्य की रोग प्रतिरोधात्मक शक्ति को नष्ट करते हैं। परहेज साधने के डर से वह आयुर्वेदिक दवाओं को ग्रहण नहीं कर पाता। जबकि परहेज बिगड़ जाने से दवाएं फायदा नहीं करें पर नुकसान कत्तई नहीं करती। ऐसी स्थिति में उस दिन की दवा नहीं लेकर दूसरे दिन से प्रारम्भ कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में हम आपकों ऐसी दवा बताते हैं, जिससे न किसी प्रकार का खतरा और न किसी प्रकार की झंझट। यह औषधि ही नहीं, एक प्रकार का रसायन है, जो आपको हमेशा तंदुरूस्त रखती है, वह है त्रिफला । मैंने स्वयं ने इसका कई वर्षों से लगातार प्रयोग किया है। आप भी प्रयोग करके देखिये।
त्रिफला के मुख्य अवयव हरड, बहड, आंवला, इसको बाजार से लाकर क्रमशः 1-2-4 के अनुपात में मिलाकर कूट, पीस कपडे से छान कर भी बनाया जा सकता है या सीधे आयुर्वेदिक स्टोर से डाबर, वैधनाथ, कृष्णगोपाल, झंडू आदि कोई से भी ब्रांड का खरीद सकते हैं।
त्रिफला लेने की विधि:- रात्रि को सोने से पहले 1/4 से 1 छोटी चम्मच (लगभग 5 ग्राम) ठंडे पानी के साथ पीकर सो जाना चाहिए। किसी प्रकार का परहेज नहीं है। यदि दूध पी रखे हो तो आधा घंटा बाद त्रिफला लेवे। कभी त्रिफला न भी ले तो कोई दिक्कत नहीं है। हमेशा लेने पर किसी प्रकार की कोई हानि नहीं है। सर्वप्रथम 1/4 छोटी चम्मच से ही प्रारम्भ करें। अधिक लेने पर कुछ दस्त भी हो सकते हैं, घबराये नहीं। अधिक कब्ज रहने पर त्रिफला गर्म पानी से भी ले सकते हैं।
लाभ-1. व्यक्ति को निद्रा भरपूर गहरी आयेगी।
2. प्रातःकाल पैसाब खुलकर आयेगा। शरीर में किसी भी प्रकार की सूजन समाप्त होगी।
3. हमेशा लेते रहने पर आँखों की ज्योति में अभिवृद्धि होगी।
4. सिर दर्द से हमेशा-हमेशा के लिए निजात मिल जायेगी।
5. पाचन संस्थान तंदुरूस्थ रहेगा। यदि कब्ज है तो मिटेगी या दस्त है तो मल बंध कर आयेगा।
6. किसी भी प्रकार के पेट दर्द में शीघ्रातिशीघ्र आराम मिलेगा।
7. पेट साफ रहने के कारण चर्म रोग में भी लाभकारी है। फोड़े-फुन्सी नहीं होंगे।
8. बुढ़ापा जल्दी निकट नहीं फटकेगा।
9. विटामिन सी भरपूर मिलने के कारण दांत-मसूड़े मजबूत रहेंगे।
10. पेट नरम होने से शरीर में लोच रहेगा।
11. त्रिफला के साथ-साथ कुछ व्यायाम करने से पेट की अनावश्यक मेदा हटेगी।
12. सर्दियोंके दिनों में यह टॉनिक की तरह काम करने से शक्तिवर्धक है, भूख बढ़ेगी।
13. वायु विकार, गैस, बदहजमी, हाथपैरों के बायटों में भी लाभ मिलेगा।
14. त्रिफला को रात में मिट्टी के सकोरे में पानी में गला कर प्रातः काल छानकर आखें धोने से आंखें स्वच्छ होती है, बचे हुए जल से सिर के बाल धोने पर बाल मजबूत, घने व काले होते हैं।
15. गर्मियों के दिनों में गर्मी से होने वाली दाह, लू, पैरों में जलन आदि में फायदा होगा।
16. सभी प्रकार के गले के रोग समाप्त होंगे।
17. मधुमेह की बीमारी से निजात मिलेगी।
इस प्रकार त्रिफला अमृत तुल्य है, जो मनुष्य को निरोग रखती है। इसे आजमाये, यद्यपि यह हर व्यक्ति के लिए साध्य है, फिर भी किसी व्यक्ति को किसी प्रकार की परेशानी हो तो वह छोड़ सकते हैं। जहां तक मैं समझता हूं, कम मात्रा पर किसी को कोई परेशानी नहीं आ सकती और वह डॉक्टर, वैद्यों से बचा रहेगा।
अपनी प्रतिक्रया अवश्य लिखें एवं दुसरो को भी शेयर करें।
बुधवार, 7 जुलाई 2021
नया सवेरा (जीवंत एवं सच्ची कहानी)
कमल ने आखें खोली, रात के दो बज रहे थे। देखा नीलू जगी हुई थी। वह पुराने कपड़े निकाल-निकाल कर फाड़ रही थी। कमल ने नीलू से कहा, देर रात तुम इस समय यह पुराने कपडों का क्या कर रही हो? नीलू ने बड़ी सहजता से कहा, आप सो जाओ, मैं मेरा काम कर रही हूँ। कमल निरूत्तर हो गया। उसे कुछ समझ नहीं आ रहा था। थोड़ी देर बाद वह फिर नींद के आगोश में समा गया।
दूसरे दिन नीलू नहा-धोकर, चाय लेकर कमल को जगा रही थी। कमल उठा, उसने चाय की चुस्किया लेते हुए फिर नीलू से रात को पुराने कपड़े फाड़-फाड़ कर इकट्ठे करने का कारण पूछा। नीलू ने कोई उत्तर नहीं दिया। बल्कि मुस्कराकर रह गई। चिड़ियायें कमरे में चहाचहा रही थी। पन्द्रह दिन पहले कैसे चिड़िया ने उनके लिए एक-एक तिनका जोड़कर घोंसला बनाया था, आज वह अपने बच्चों के लिए एक-एक दाना उनके मुंह में डाल रही थी। कमल अब समझ चुका था।
कमल ने देखा कि हर जीव जंतु को अपनी प्रकृति का ख्याल रखना होता है। प्रकृति को अवरूद्ध करना या उसके विपरीत चलना ही सृष्टि का विनाश करना होता है। उसके कई दुष्परिणाम जीव जंतुओं को भुगतना पड़ता है। मनुष्य जान बूझकर भी विनाश के गर्त में पड़ता जा रहा है।
नीलू का यह चौथा प्रसव था। उसका एक प्रसव उसके ससुराल तथा दो प्रसव उसके मैके में हो गये थे। नीलू की सास से पटरी नहीं बैठती थी तो कमल की अपने श्वसुर से छत्तीस का आंकड़ा था। यह अलग बात है कि खोटे समय में अपने पुत्र को देखते हुए कमल की माँ नीलू पर जान छिड़कती थी तो यही हाल नीलू के पिता का था। वे भी नीलू को देखते हुए कमल के भले के लिए चौक चौबंद रहते थे। रिश्ते की कड़ियां ही ऐसी थी कि न चाहते भी चाहना पड़ता था। नीलू के पापा ने कमल को कुछ दिन पहले ही कहा था-कंवर साहब आपके लड़कियां नहीं है, एक बार जापा(प्रसव) कराके देखो, सब पता पड़ जायेगा। उनके बोल कमल के सीने में नश्तर से चुभ रह थे। दोनों ने यह संकल्प कर लिया था, अबकी बार यह प्रसव दूसरी जगह ही होगा।
शाम के समय कमल चार बजे ही विद्यालय से घर पर गया था। नीलू की दशा विकल थी। उसने हनुमान को बुलाया, हनुमान उनका विश्वासपात्र एवं आज्ञाकारी आठवीं कक्षा का विद्यार्थी था। हनुमान के घर वाले भी हनुमान को गुरूजी के सेवा के लिए हमेशा कहते कि बेटा गुरू की सेवा में ही मेवा है, यही नहीं हनुमान के घर वाले गुरूजी के लिए कभी दूध-दहीं तो कभी आंवले भिजवा दिया करते।
कमल ने हनुमान से कहा, हनुमान तुझे आज अपनी उडान उडनी है, पास के गांव से वैद्यराज जी को बुलाना है। आज तेरे बहिनजी की तबियत खराब है। हनुमान ने कहा गुरूजी आप चिन्ता न करे, मैं अभी साईकिल से वैद्यराज को लेकर ही आता हूँ।
देखते ही देखते एक घंटा बीत गया, पर हनुमान नहीं आया। रास्ता भी ऐसा ही था, उबड़-खाबड़ रेत के टीबे थे, पास में एक नाला था, जहां अनिकट बंधा था। रेत ही रेत का अंबार था। कमल के लिए एक-एक पल बड़े असह्य होते जा रहे थे। नीलू छटपटा रही थी। कमल के धैर्य का बांध छलक रहा था। उसके मस्तिक में उल्टे-सीधे विचारों का प्रवाह बह रहा था। अब उससे नहीं रहा गया। किसी पड़ोसी महिला को अपने बच्चों और नीलू का ध्यान रखने के लिए कहकर कमल भी वैद्यराज को बुलाने निकल पड़ा । नीलू को कह दिया कि मैं अभी गया और अभी आया, तू जरा भी चिंता मत करना। कमल पैदल ही निकल पड़ा। वैद्यराज जी का गांव तीन किमी दूर था। कमल लगभग भाग रहा था। कभी सांस फूल जाती थी तो रूक जाता और कभी नीलू का ध्यान आता तो वह दौडने लग जाता, उसमें नई शक्ति आ गई थी, पैरों में पंख लग गये थे। रेतों के टीबों को रौंदते हुए कुछ ही मिनटों में वह वैद्यराज के गांव में जा पहँचा। वैद्य जी सवाईमाधोपुर के रहने वाले थे। वर्षों से यही आकर रहने लग गये थे। आस-पास के गांवों में उनका बडा नाम था। वह सिद्ध हस्त थे। आज दिन तक उनका कोई केस ख़राब नहीं हआ था। अच्छे-अच्छे अंग्रेज डॉक्टरों को भी बात मात दे दी थी। यहां तक कि अंग्रेजी डॉक्टर भी उनसे द्वेष रखने लगे थे। आस-पास के सारे बीमार जन आयुर्वेद औषधालय ही आते। प्रसव में वैद्य जी का कोई सानी नहीं था। ब्राह्मण होने के नाते वे दवाई देने के साथ-साथ मंत्रोच्चार भी करते। दवा और मन्त्र दोनों ही काम करते, फिर भी वैद्यराज बहुत सहज थे। गांव अभी कोसों दूर थे। जब भी कहीं कोई बुलावा आता, वह पैदल ही निकल पड़ते। पीड़ित की पीड़ा हरने में ही उन्हें परम शांति मिलती थी।
कमल को वैद्य जी के ठिकाने का पता नहीं था सो घुसते ही चौपाल पर बैठे बुजुर्गों से वैद्य जी के बारे में पूछा। उन्होंने बताया कि एक लड़का उनको साईकिल पर बैठाकर तुम्हारे उधर ही दूसरे गांव में लेकर गया है। कमल ने सोचा मेरे रास्ते में तो वे नहीं मिले। कमल की सांस मानो अटक गई थी, नीलू का ध्यान आते ही फिर उसके पैरों में पंख लग गये। वह गांव के बुजुर्गों द्वारा बताये हुए तिराहे से फूटे हुए दसरे रास्ते पर वैद्य जी के पीछे चल पड़ा। रास्ते में वह उस दूसरे गांव में राहगीरों से वैद्य जी के बारे में पूछता रहता, जिसकी उसको पुष्टि हो चली थी। दौड़ता भागता वह उस दूसरे गांव में भी आ गया था। गांव में घुसते ही कुछ लोग गुरूजी को पहचान गये थे, शायद इस गांव के बच्चे गुरूजी के गांव में पढ़ते होंगे सो ज्योंही गुरूजी ने वैद्यजी के बारे में पूछा तो वहां खड़े एक-दो बच्चों ने कहा कि वह हनुमान के साथ आपके गांव गये हैं। मौसम में मावट के संकेत थे, पानी की बूदें गिरने लग गई थी, धुंधुलका छा गया था। गांव का रास्ता भी अनजान था। कमल सोच रहा था-नीलू न जाने कैसे होगी, भगवान ही बचाये। अब गुरूजी के सब्र का बांध टूट चुका था। आंखों में आँसू छलक आये थे। गांव में सज्जन व्यक्तियों का वास था। गांव वालों ने गुरूजी की मनोदशा ताड़ ली थी, ग्रामवासियों ने कहा, आप चिंता नहीं करे, भगवान अच्छा ही करेगा। गुरूजी के रास्ता न पहचानने की दशा पर ग्रामवासियों ने एक नवयुवक को साथ कर दिया। उसने छाता ले लिया था। दोनों अंधेरे धुंधलके में पानी की रिमझिम के बीच गांव के किनारे आ गये थे। गुरूजी की जान में जान आने पर वह नवयुवक गुरूजा से अनुमति लेकर वापस अपने गांव मुड़ गया था।
कमल जल्दी-जल्दी घर की तरफ दौड़ा। नीलू को गांव की महिलाएं घेर रखी थी। वैद्य जी वहां पहुंच चुके थे। वैद्य जी ने कुछ दवाये दे दी थी। नीलू को आराम मिल गया था। वैद्य जी ने कहा अभी पन्द्रह दिन का इन्तजार कीजिए, बहिन जी को कुछ नहीं हुआ है। मैं स्वयं पन्द्रह दिन बाद आ जाऊंगा। या आता जाता देख लूंगा। अभी चिन्ता की कोई बात नहीं है।
सचमुच नीलू ठीक हो गई थी, उसने रोटी खा ली थी। पर अभी कमल पर से खतरा टला नहीं था। पन्द्रह दिन बाद क्या होगा, ऐसा सोचकर ही उसके रोंगटे खड़े हो जाते थे। देखते ही देखते आज पद्रहवां दिन था। यदा कदा वैद्य जी गांव में आते तो सार-संभाल पूछ जाते। आज वैद्य जी भी गांव में ही थे। कमल को कह दिया था कि मैं गाव में ही हूँ जब भी जरूरत हो मुझे सूचना दे देना। रात के आठ बजे कमल ने वैद्य जी को सूचना दी,। वैद्य जी शीघ्र गुरूजी के पास आ गये। नीलू को देखा, वे समझ गये। उन्होंने कुछ समय बाद मंत्रोच्चार के साथ एक इंजेक्शन नीलू के लगाया। गांव में एक महिला थी जो दांई काम भी करती थी, उसका बंदोबस्त पहले ही कर दिया गया था। वह भी वही थी। रात के दो बज चुके थे। कमरे में बच्चे के रोने की आवाज आ गई थी। वैद्यजी ने कमरे में जाकर नीलू को आवश्यक दवाएं दी और बाहर आ गए। यद्यपि कमल वैद्य जी को रोकना चाह रहा था, लेकिन वैद्य जी नहीं रूके, उन्होंने कह दिया अब चिन्ता की कोई बात नही है, मैं आज इसीलिए रुका हुआ था। कोई बात हो तो बता देना। वैद्य जी रात के दो बजे पैदल ही अपने गांव निकल गये।
मुंह अंधेरे ही कमल उठ गया था। यद्यपि नीलू को अपने खून से लथपथ कपड़े पति से धुलवाने में संकोच हो रहा था। लेकिन कमल ने उस संकोच को दूर करते हुए कहा कि भगवान ने तुझे बचा लिया, वही मेरे लिए बड़ी बात है, यह कपड़े धोना मेरे लिए कोई बड़ी बात नहीं है।
गांव के बाहर चड़स चल रहा था, उसने बाल्टी भरी और सारे कपडे खल-खल खंगाल दिये। मंदिर के बाहर दूर से ही ढोक लगाई। आज का सूर्य कमल के लिए नया सूरज था। नीलू के प्राण बच गये थे। घर पर नीलू प्रसन्न थी। बच्चा नीलू से लिपटा हुआ थिरक रहा था।
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गुरुवार, 1 जुलाई 2021
बधाई पत्र (नरेन्द्र मोदी के नाम)
(यह पत्र दाधीच सुबोधिनी के जून, 2014 के सम्पादकीय से लिया गया है। आरोह-अवरोह का क्रम सतत जारी रहता है, मंथन आपको करना है कि हम कितने कामयाब हुए है।)
आदरणीय नरेन्द्र मोदी जी!
नमो नमः। आपकी कामयाबी एवं जज्बे को बहुत-बहत सलाम। देश की जनता की ओर से बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं। आपने भारतीय संस्कृति की ऐसी मिशाल रखी कि जनता कायल हो गई। साधारण जीवन जीने वाले माँ के दुलारे मोदी को माँ का अपूर्व आशीर्वाद मिला। जहाँ-जहाँ आप गये, भारत माता का आंचल विस्तारित होता गया। आपकी अथक मेहनत, निर्भीकता, जनता का आपके प्रति करिश्माई विश्वास, आपकी सेवा भावना ने बीजेपी को ऐसी ऐतिहासिक जीत दिलवाई, जिसका सपना स्वयं आप और बीजेपी ने भी नहीं सोचा था। कभी मोदी बनाम बीजेपी तो कभी बीजेपी बनाम मोदी एक दिखाई देने लगे। आपने जनता को आश्वस्त कर दिया था कि आपका दिया हुआ प्रत्येक वोट सीधा मझे ही प्राप्त होगा। आपने कांग्रेस को 60 वर्ष दिये हैं, मझे केवल 60 माह ही दीजिये, मैं आपका सेवक बनकर आपकी सेवा करूंगा। जनता ने पूर्ण विश्वास किया और आखिर लोकतंत्र ने करवट बदली। लोकतंत्र ही विजयी हुआ। नमो का नमो-नमो मंत्र सिर चढ कर बोला। चाय बेचने वाले एक साधारण व्यक्ति को देश की जनता ने भारत का सरताज बना दिया। आपको भी जहाँ बोलना था खुलकर बोले। कश्मीर में धारा 370 के नफे-नुकसान पर एक बार कश्मीरियों को सोचने पर विवश कर दिया। यद्यपि कुछ पार्टियां आपको सांप्रदायिक बताती रही लेकिन देश के सभी जाति-धर्म के लोगों ने आपका खलकर समर्थन करते हुए एक छत्र पाटी के रूप में सिरमौर बना दिया तथा जहाँ जिस बिन्दु पर नहीं बोलना था, वहाँ आप चुप रहे। अपने ही बिरादरी के नेताओं के उपेक्षा भाव को आपने अपनी सादगी और सदाचार से अपने पक्ष में बोलने को मजबूर कर दिया। कांग्रेस में कोई कद्दावर नेता नहीं होने से कई राज्यों में तो पत्ता ही साफ हो गया। चुनाव से पहले चारों खाने चित्त हई मुख्य विपक्षी पार्टी दहाई के अंकों में ही सिमट कर रह गई। देखा जाये तो कांग्रेस के प्रति जनता की असंतुष्टि ही आपकी विजय माला बनी। बसपा का आरक्षण कार्ड भी बसपा को नहीं बचा सका और अंत में उसी को ले डूबा। अब भी हमें एक बार आरक्षण पर भी नये सिरे से सोचने की आवश्यकता है। उत्तर प्रदेश में सत्तासीन सपा भी आपकी लहर को रोक नहीं सकी। संघ, विहिप, बाबा रामदेव सबने आपको जिताने की पहले ही कमान संभाल ली थी।
किसान, बेरोजगार युवा, व्यापारी, सबको आप मसीहा के रूप में दिखाई देने लगे। देश की संत्रस्त जनता को गुजरात मॉडल दिखाकर आपने नई जान फूंक दी। आपमें वह मौलिकता तो है ही, जिसकी जनता कायल है। संसद की पहली सीढ़ी पर सिर नवाकर, सभी पडौसी देशों को अपने शपथ ग्रहण समारोह में बुलाकर आपके प्रति जनता का विश्वास और गहरा हो गया। अब आपको जनता की आकांक्षाओ पर खरा उतरना है, हमें विश्वास है कि आपकी निश्छल सेवा पारायणता से आप हर मोर्चे पर कामयाब होंगे।
पहला मोर्चा-बेरोजगारी-यह ऐसा मोर्चा है, जहां कल का भविष्य खड़ा है। युवाओं के माता-पिता संत्रस्त हैं, उन्होंने अपनी गाढ़ी कमाई से अपने पुत्रों को पढ़ा लिखाकर विभिन्न क्षेत्रों में ट्रेनिंग तक करवा दी है, लेकिन फिर भी उनको काम नहीं मिल पा रहा है। ऐसी स्थितियों में उन ट्रेनिंग सेन्टरों का क्या औचित्य रह जाता है? प्राईवेट सैक्टर में न स्थाई रूप से काम की गारन्टी है और न ही सरकार के बराबर पैसा मिलता है। और तो और जातिगत आरक्षण ने योगयता के सारे मापदंडों के परखच्चे उड़ा दिये हैं। सर्वप्रथम हमें इस मोर्चे पर सफलता हासिल करनी है। बिना भेदभाव हर जाति के युवाओं को हर हाल में काम मिलना ही चाहिए ताकि उनकी भी गृहस्थी बन सकें। आज तो स्थिति यह है कि यदि किसी लड़की को सरकारी नौकरी मिल गई तो उसको सरकारी नौकरी प्राप्त वर ढूंढने के लिए पसीने छूटने लगते हैं और वह लड़की अनब्याही रहने पर लाचार हो जाती है या कभी सामाजिक मर्यादा के बंधनों को ठुकरा देती है या कभी सरकारी नौकरी शुदा वर मिल भी जाये तो उस वर को हासिल करने के लिए वधु पक्ष को वर पक्ष की हर मनोवांछित कामना पूरी करनी पड़ती है। दोनों ही स्थितियों में युवतियों के परिजनों को घोर दुःख उठाना पड़ता है। इसलिए यह आवश्यक नहीं कि लडकियों को रोजगार के दंगल में धकेला जाये। उनके लिए तो वैसे ही गृहस्थी में इतना काम है कि उसमें पुरुष को पौरूष भी हिम्मत हार जाता है। और यह भी आवश्यक नहीं कि युवकों को 20-25 हजार ही मिले, लेकिन उनको न्यूनतम जीवन स्तर को चलाने के लिए उचित वेतन तो मिलना ही चाहिए, अन्यथा यही बेरोजगारी एक दिन अराजकता के रूप में सिर दर्द बन सकती है। इसके लिए बाकायदा रोजगार मंत्रालय खोला जा सकता है। जिसके माध्यम से सर्वे कराकर हर बेरोजगार को स्वरोजगार या प्राईवेट या सरकारी तंत्र में खपाया जा सकता है। सेवा निवृत्ति की आयु घटाकर या ऐच्छिक सेवा निवृत्ति के द्वारा युवकों के लिए रोजगार के अवसर खोले जा सकते हैं। रोजगार के अभाव में प्रत्येक दंपति से किसी एक को रोजगार का विकल्प दिया जा सकता है ताकि गृहस्थी का पहिया भी नहीं डगमगाये। वैसे भी नारी ही समर्पित मार्ग दृष्टा है जो अपने पति तथा अपने बच्चों का घर में रहकर मार्ग प्रशस्त करती आई है। आज स्थिति यह है कि परंपरागत उद्योग धंधे प्राय: नष्ट हो गये हैं, व्यक्ति जाये तो कहाँ जाये? यद्यपि आधुनिक टेक्नोलोजी अच्छी है, लेकिन जनशक्ति की इससे घोर उपेक्षा हुई है। हमें देश की पूरी श्रम शक्ति को 18 से 20 वर्ष से दोहन कर देश को पॉवरटी बनाना है। इसके लिए हमें पिता की तरह सोचकर उन युवाओं को आत्म निर्भर बनाना है, तब ही हम कल्याणकारी राज्य का सपना संजो सकते हैं। वैसे भी पैसा किसी के पास ठहरता नहीं है, बल्कि यही पैसा आदमी को रन कराता है।
दूसरा मोर्चा-कृषि-आज यदि सबसे ज्यादा दुःखी है तो वह है भारत का किसान। उसकी सारी उपज आधुनिक टेक्नोलोजी के भेंट चढ़ गई है। बीज की बुवाई से लेकर निराईए सिंचाईए कटाई, एवं लदाई तक वह सारा पैसा खेती पर स्वाहा करता आया है। पशुधन के अभाव में वह रासायनिक खाद दवाइयां आदि के लिए दूसरों का मुँह ताकता रहता है। उसके परिवार की सारी श्रम शक्ति कृषि पर लगी रहती है, उसके बावजूद प्राकृतिक आपदा यथा-सूखा बाढ़ए ओला वृष्टि से उसकी मेहनत का किया कराया सब चौपट हो जाता है। आज अन्नदाता की कद्र बिगड़ गई है। कोई अन्नदाता बनना ही नहीं चाहता, जबकि केवल खाद्य सामग्री ही नहीं अपितु सारे उद्योग धंधे कृषि जिंसों पर निर्भर है। हमें हर हाल में कषि पर ध्यान देना है। हमारे भारत की अधिकांश जनता इसी पर निर्भर है। हमारी कृषि बच गई तो समझ लो हम बच गये। सौर ऊर्जा के माध्यम ये हम किसानों को ही नहीं हर व्यक्ति को आत्म निर्भर बना सकते हैं, क्योंकि हमारा सारा जीवन सूर्य से ही संचालित होता है। हमें उन्नत कृषि एवं पशुओं के संरक्षण पर जोर देकर किसानों को पुरस्कार देते हुए उनका मान बढ़ाना है। क्योंकि आज भी हमारे देश में 70 प्रतिशत किसान मौजूद है, हमें उनका कृषि से पलायन रोकना है। जय जवान-जय किसान का नारा एक बार और बुलंद करना है। उसके लिए कृषि मंत्रालय को सजग करना है। कृषि एवं पशु संपदा से ही हम खुशहाल बन सकते हैं। पशुवध पर पूर्ण पाबंदी ही नहींए कठोर दंड का विधान होना चाहिए। आज पर्यावरण पूर्ण रूप से क्षत-विक्षत हो गया है जिसका खामियाजा हमें कई व्याधियों के रूप में भुगतना पड़ रहा है।
तीसरा मोर्चा-व्यापार/वाणिज्य-यह देश का रीढ़ खंभ है। इसी के बलबूते हम घर बैठे एक देश के कोने से देश के दूसरे कोने में वस्तु खरीदने में कामयाब हो सकते हैं। व्यापार वाणिज्य को हमें भय मुक्त बनाना है। आज आये दिन सरकारी कारिंदों के द्वारा छापे की कार्यवाही ने उनकी हवा निकाल दी है। टैक्स पर टैक्सों का भार आखिर जनता को ही भुगतना पड़ता है। ये व्यापारी ही है जो हमें अन्नए वस्त्रए दवाइयां एवं कई रोजमर्रा की ढेर सारी वस्तुएं हमें घर बैठे उपलब्ध करवाते हैं। व्यापार वाणिज्य के द्वारा भी हम बेरोजगारों को खपा सकते हैं। हमें लाइसेंस प्रणाली को एक सिरे से खारिज करना है, इसकी तह में भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार है। सरकारी कारिन्दे द्वारा इसी कारण अन्य व्यापारियों के नाक में दम किया जाता रहा है। सोचो यदि लाईसेन्स नहीं होगा तो हर व्यापारी उस वस्तु को आपके पास पहुँचाने की कोशिश करेगा और वैसे भी ईमानदार व्यापारी ही इसमें कारगर होता है । जनता इतनी मूर्ख भी नहीं कि कोई उसको बरगला सके, लेकिन यदि उस व्यापार में लाइसेंस द्वारा एकाधिकार होता है तो उसमें उसको कुछ हिस्सा सरकार के कारिन्दों को तथा कुछ हिस्सा अपने लिए अनाधिकृत रूप से रखने की सोच विकसित होती है। हमें व्यापार वाणिज्य में शुद्धता के लिए उत्पादित स्तर पर ध्यान रखना है। छोटे-मोटे व्यापारियों को नाजायज परेशान करने से कोई औचित्य नहीं है।
चौथा मोर्चा-नशा मुक्ति-यह मोर्चा ऐसा है जिसमें बड़े-बड़े भूपति भी अपना सब कुछ दांव पर लगाकर धूल चाटते फिर रहे हैं। इन मादक द्रव्यों ने कई बसी बसाई गृहस्थी को उजाड़ कर राख कर दिया है। इनसे आसक्त होकर कई युवक कई प्रकार की व्याधियों की चपेट में आ गया है। जिसका खामियाजा पूरे परिवार को ही नहीं, रिश्तेदार, समाज, देश तक को भुगतना पड़ रहा है। पूरा देश चाहता है कि गुजरात मॉडल की तरह भारत नशा मुक्त हो जाये। आज बीड़ी-सिगरेट, तम्बाकू-गुटका शराब की हर चौराहे पर दुकाने सजी है। सरकार अपने कोष को भरने के लिए बाकायदा उनको संरक्षण देते देखे गये हैं। उनको यह नहीं भूलना चाहिए कि जितनी आमदनी उन विषैली नशा सामग्री से होती है, उससे कहीं अधिक गुना उनसे होने वाली बीमारियों पर दवा आयात करने से नुकसान हो जाता है। आज ऐसे व्याधियों के गिरफ्त में वह युवक जल्दी आ जाता है जिसको रोजगार तो उपलब्ध हो गया है पर उसको संभालने के लिए उसकी संगिनी नहीं है या वह एकल रूप से रहता है। और जब उसको संगिनी मिलती है तब तक काफी देर चुकी होती है।
पांचवां मोर्चा-पुलिस एवं न्यायपालिका-कहने को तो हर पुलिस कार्यालय पर बोर्ड लगा रहता है 'आम आदमी में विश्वास और अपराधियों में डर' लेकिन होता उल्टा है। आम आदमी पुलिस से डरा-डरा महसूस करता है और अपराधी बेखौप होकर पुलिस के इर्द-गिर्द ही घूमता रहता है। कोई सी घटना घटने पर आम आदमी पुलिस के पास जाने से ही कतराता है और चला भी जाता है तो उसकी एफ.आई.आर. ही दर्ज नहीं होती या होती भी है तो उसके मन मुताबिक नहीं लिखी जाती है, बल्कि दूसरे पक्ष के वांछित अपराधी से भी शिकायत लिखाकर क्रोस केस दर्ज कराकर इतिश्री कर ली जाती है। पुलिस में भ्रष्टाचार जोरों पर है, उन्हें कोई कहने-सुनने वाला ही नहीं है। इसी तरह न्यायपालिका में वकीलों की चांदी है। छोटे से केस में कई वर्ष लग जाते हैं। कई बार तो जीते जी न्याय ही नहीं मिल पाता। न्याय में देरी ही बहुत बड़ा अन्याय है। पुलिस के द्वारा लाये हुए बड़े से बड़े अपराधी को जमानत मिल जाती है। साधारण व्यक्ति न्यायपालिका की ओर जाना ही पसंद नहीं करता। हमें न्याय शीघ्र दिलवाकर न्याय के मंदिर को पवित्रतम बनाना है।
देश में वैसे बहुत सारे मोर्चे हैं यथा-वैदेशिक नीति, भ्रष्टाचार का अंत, धर्म निरपेक्षता, नक्सलवाद, राजनैतिक सामंजस्यता, समरसता आदि जहां आपको जीत हासिल कर देश की जनता की वाहीवाही बटोरनी है। हमें आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि आपके द्वारा बहुत सारा समाधान तो आपके व्यक्तित्व की सच्चरित्रता से ही पूरा हो जायेगाए जो आपको विरासत में मिला है। कहा भी गया है यथा राजा तथा प्रजा। एक बार आपको पुन: इस ऐतिहासिक विजय पर हार्दिक बधाई। आशा है, पूरी संजीदगी से जिस दम पर आप विजयी हुए है, उसी संजीदगी से देश का मान बढ़ाने में भी आप कामयाब होंगे। देश का भविष्य आपके साथ खड़ा है, सोचना आपको है। धन्यवाद।।
बुधवार, 30 जून 2021
ग्रहयोग (एक जीवंत एवं सच्ची कहानी)
आज तीन अक्टूबर था। मदनगोपाल पूजा-पाठ से निवृत्त हो चुके थे। वे अपने कस्बे से तीन किलोमीटर दूर एक गाँव के मिडिल स्कूल में अध्यापक थे। दो अक्टूबर का अवकाश होने के कारण उन्हें आज तीन अक्टूबर को अपने विद्यालय में महात्मा गांधी एवं शास्त्री जी की की जयंती मनानी थी। वे उत्सव प्रभारी होने के नाते घर पर ही जयंती के सांस्कृतिक कार्यक्रम में भाग लेने वाले विद्यार्थियों की सूची देख रहे थे। इतने में लक्ष्मी ने में कहा चाय पकड़ाते हुए कहा.देखो जी, आज मैंने बुरा सपना देखा है। सुबह मैं गहरी नींद में थी कि मैंने देखा, दो चोर मेरे कमरे में आ गये। उन्होंने मेरे सन्दूक से कुछ रुपये निकाल लिए और मेरे कपड़े को तितर-बितर कर दिया। देखते ही देखते वे चोर बंदर की शक्ल के हो गए और मेरी आँख खुल गई। देखा तो कुछ नहीं था, लेकिन मैं एकदम से डर गई। मदनगोपाल ने बडी इत्मीनान से अपनी पत्नी को समझाया कि अपने पास क्या है लक्ष्मी, जो चोर लेकर जायेगा और ले जाता है तो ले जाने दो, उसका भाग्य है और वैसे भी सपने, सपने होते हैं। मुझे तो तनिक भी इनमें विश्वास नहीं है और देखा जाये तो मेरे घर की लक्ष्मी तो तुम हो। जब तक तुम हो परिवार का बाल भी बांका नहीं हो सकता। लक्ष्मी ने मुळकते हुए कहा, तुम्हें बातें बनाना ज्यादा आता है जी, मैं तो लगभग घबरा ही गई थी और वे बाहर निकल गये।
मदनगोपाल समय के बड़े पाबंद थे। लक्ष्मी को भी सुबह अपने काम में जल्दी लगी रहती थी। देखना कहीं देर हो जाये। अपने पति व बच्चों को तैयार कर उनके काम पर चले जाने के बाद ही वह आराम महसूस करती थी। रोजाना की भाँति आज भी लक्ष्मी ने जल्दी-जल्दी खाना तैयार किया। बच्चों के टिप्पन तैयार किए और स्कूटर पर एक बच्चे को आगे तथा दो बच्चों को पति के पीछे बैठा कर टा-.टा, टा-टा किया। उनके तीनों बच्चे कस्बे के एक ही विद्यालय में पढ़ते थे।
मदनगोपाल ने बच्चों को उनके विद्यालय के पास स्थित पेट्रोल पंप पर छोड़ दिया। वहां से कुछ दूरी पर ही विद्यालय था। लौटते समय रास्ते में बच्चों के गुरुजी मिल गए। मदनगोपाल ने उनका अभिवादन किया, कुशलक्षेम पूछी। बच्चों के गुरुजी ने पूछा, क्यों गुरुजी! आजकल आपके बच्चे विद्यालय नहीं आ रहे हैं? मदनगोपाल ने कहा, ऐसा कैसे हो सकता है? मैं हमेशा की भांति अभी भी पेट्रोल पंप चौराहा छोड़कर आया हूँ। ये कहकर वे निकल गए। रास्ते में वे सोचते जा रहे थे, आखिर बच्चे चौराहे से कहाँ जाते हैं। उनके गुरुजी झूँठ नहीं बोल सकते। हो सकता है, उन्हें ध्यान न हो। शाम को खबर लेंगे।
साढ़े चार बज चुके थे। बच्चे अब तक घर पर नहीं आये। अब लक्ष्मी भी विचलित होने लगी थी। जैसे-तैसे पौने पाँच बज गएथे। मदनगोपाल ने बडे बच्चे को साथ लिया। अपने स्कूटर से सारी जगह टटोली, जहाँ बच्चे जा सकते थे- विद्यालय, खेल का मैदान, रावण चौक, काला हत्था पर कहीं बच्चों का कोई थाह नहीं था। समझ में नहीं आ रहा था कि करे तो क्या करे? थक-हार कर अपने पड़ोसियों को सारी बात बताई। पड़ोसियों ने सांत्वना दी कि हो सकता है, आपके बच्चे आपके गाँव दादी के पास चले जाये। इतने अधीर ना हो, बच्चे कहीं न जायेंगे, मिल जायेंगे। शाम के सात बज गए थे। अंधेरा घिर आया था। मदनगोपाल का धैर्य जवाब दे चुका था। उसका खाना-पीना, आराम सब हराम हो चुके थे, यहां तक कि उसका पांच बजे से मल-मूत्र त्याग भी बंद हो चुका था। हारकर उसने लक्ष्मी से कहा, चलो कुछ रुपये दो, गाड़ी रिजर्व में चल रही है, तेल भी भरवाना है। लक्ष्मी को कुछ दिन पहले ही मदनगोपाल ने अठारह सो रुपये दिये थे। लक्ष्मी ने उनको हरिद्वार से लाये चोलड़े में रखा था। पर यह क्या, लक्ष्मी ने पूरे चोलड़े को उलट-पुलट कर खंगाल दिया, लेकिन रुपयों का काई अता-पता नहीं था। लक्ष्मी ने लगभग रोते हुए कहा अरे राम! वे रुपये भी गए और छोरे भी गए। अब क्या करूँ? पास के सटे हुए मकान में देबीशंकर जी अकेले रहते थे, वे बुजुर्ग थे। उनका मदनगोपाल के परिवार से पुत्रवत् स्नेह था। मदनगोपाल उनको काकाजी कहकर पुकारता था। उसने देबीशंकर जी के पैर पकड़ लिए और कहा कि अब क्या करूँ? परिवार पर आफत आ चुकी थी। देबीशंकर जी ने ताड़ लिया कि मदनगोपाल के पास एक धैला भी नहीं है। उनका दिल पसीज गया, उन्होंने कहा, बेटा चिंता मत कर, मैं तेरे साथ हूँ। मदनगोपाल को डूबते को तिनके का सहारा मिल गया।
मदनगोपाल ने देबीशंकर को साथ लिया और थाने में रिपोर्ट दर्ज करवाने लगे। थानेदार ने पूछा, क्या किसी पर उनको शंका है? मदनगोपाल के अब तक कोई दुश्मन भी नहीं था, जिसका नाम लिया जा सकें। उसने कहा, हमारे कोई दुश्मन नहीं है। हाँ, हो सकता है वे कहीं अपनी दादी से मिलने गाँव चले गए हो। थानेदार ने कहा, पहले अपने गाँव की जानकारी ले लो, फिर हम तुम्हारी एफ.आई.आर. दर्ज कर लेंगे।
काकाजी ने अपने मिलने वालों से किराये की एक जीप ली तथा बच्चों को ढूंढने निकल पड़े मदनगोपाल के गाँव। रास्ता बहुत खराब था। अभी हाल ही में बरसात हुई थी। जगह-जगह पानी भरा हुआ था। आसोज का महीना था। नवरात्रा चल रहे थे। गाँव में माईक से रामलीला के मंचन की आवाजें आने लगी थी। हारमानियम एवं नगाड़े ताबड़तोड़ बज रहे थे। रावण जोर-जोर से चिल्ला रहा था। अचानक गाड़ी के ब्रेक लगे। गाडी हिचकोले खा रही थी। रात्रि के ग्यारह बज चुके थे। मदनगोपाल ने घर की कुन्दी खटखटाई । माँ ने दरवाजा खोला। मदनगोपाल ने बच्चों के बारे में माँ से पूछा तो उसके भी होश उड़ गए। बच्चे वहाँ नहीं आये थे। मदनगोपाल ने सोचा, हो सकता है, रामलीला देखने ही चले गए हो। रामलीला के दर्शकों में देखा, भीड़ छंट चुकी थी। इनेगिने दर्शक ही रह गए । बच्चों का कहीं अतापता न था।
मदनगोपाल ने माँ को भी अपने साथ ले लिया। गाड़ी कस्बे में आ चुकी थी। रात के साढ़े बारह बज चुके थे। थाने में सिपाही बैठा-बैठा ऊंघ रहा था। सिपाही से प्राथमिक रिपोर्ट लिखने को कहा गया। सिपाही ने कहा, रिपोर्ट सुबह लिखा देना, अभी इंचार्ज अपने क्वार्टर पर चले गए हैं। अभी तो आप बच्चों के हुलिए बता दीजिए। मदनगोपाल ने बताया, बड़े बच्चे का नाम सुनिल है, छटी कक्षा में पढ़ता है। सांवले रंग का है। स्कूल ड्रेस में है। दूसरा छोटा बच्चा गौर वर्ण का है, उसका नाम अनिल है। चौथी कक्षा में पढ़ता है। वह भी नीले रंग की स्कूल ड्रेस में है और अपना एड्रेस लिखा दिया।
रात के एक बज चुके थे। बच्चों के अपहरण संबंधी तरह-तरह के विचार घुमड़ रहे थे। सोच रहा था, अब क्या होगा? न जाने क्या हश्र होगा? वे मिलेंगे भी या नहीं? एक साथ दो-दो बच्चे चले गए। घर में भी कोहराम मचा था। पास की स्त्रियां लक्ष्मी को दिलासा देकर अपने-अपने घर जा चुकी थी। लक्ष्मी बदहवाश हुए जा रही थी। होनी के आगे कौन क्या कर सकता है?
मदनगोपाल माँ पर बरस रहा था, सुनील को बिगाड़ने में तेरा ही हाथ था। माँ कह रही थी, सुनिल गलत था, पर तेरा जाम अनिल तो तेरे पास ही रहता था, वह उसके साथ क्यों गया? मदनगोपाल कह रहा था, यदि बड़ा लड़का बिगड़ा हुआ है, गलत है तो छोटे की क्या गलती, वह भी तो उसके साथ जा सकता है।
एक-दूसरे पर आरोपों की झड़ी चल रही थी। मदनगोपाल ने सोचा था, माँ से कहीं कुछ दिलासा ही मिलेगी लेकिन वह ता जले पर नमक छिड़क रही थी। यद्यपि लक्ष्मी और उसके सास के बीच छत्तीस का आंकड़ा था। लक्ष्मी जानती थी कि उसकी सास का कोई नहीं जीत सकता, सारी पोट उस पर ही आ जायेगी। इसलिए लक्ष्मी बीच-बीच में लक्ष्मी मदनगोपाल को ही चुप किये जा रहा थी। देखो जी, सब लोग सो रहे हैं। कोई क्या कहेंगे। तुम तो चुप हो जाओ। माँ का पारा सातवें आसमान पर था। वह सुनाना ही जानता थी। सुनना उसके वश में ना था। मदनगोपाल के दिल में रह-रह कर शूल उभर रहे थे। लक्ष्मी जहर का घूंट पी रही थी। माँ बेटे में बहस चल रही थी। रात के दो बज चुके थे। अचानक लक्ष्मी ने कहा, रुको, जरा चुप भी हो जाओ, बाहर कोई है। बाहर से कोई मदनगोपाल-मदनगोपाल पुकार रहा था। गेट खोल दिया गया। बाहर दो आदमी खड़े थे।
उनमें से एक ने कहा, मैं पुलिस से आया हूँ, तुम्हारा नाम मदनगोपाल है?
मदनगोपाल ने कहा, जी मैं ही मदनगोपाल हूँ।
सिपाही : आपके बच्चे खोये हैं?
मदनगोपाल : जी हाँ, पर वे कहाँ हैं?
सिपाही : वे मिल चुके हैं, आप चिन्ता न करें।
मदनगोपाल : क्या वाकई आप सच कह रहे हैं? मैं आपके पैरों पड़ता हूँ। आप केवल सांत्वना ही दे रहे हैं या सच ही में बच्चे मिल मिल गए हैं। मदनगोपाल, लक्ष्मी एवं माँ सभी उस सिपाही के पैरों में पड़-पड़ कर गिड़गिड़ा रहे थे। सिपाही ने कहा, माताजी आप बड़े हैं। चिन्ता न करें, सब ठीक है। बच्चे सकुशल हैं, लेकिन वे यहाँ नहीं है। इस समय वे जयपुर में हैं। सिपाही ने कहा, मदनगोपाल आप हमारे साथ चलिए। मदनगोपाल ने काकाजी को भी साथ कि लिया, अब वे दो से चार हो गए थे। चौराहा तक वे पैदल-पैदल आए। सिपाही ने होटल से अपने साथ लिये हुए व्यक्ति को वहीं पास की होटल में छोड़ दिया। सिपाही की गाड़ी वहीं पैट्रोल पंप पर खड़ी थी। सिपाही ने मदनगोपाल से कहा, गाड़ी में तेल कम है, इसे भरवा दीजिए। मदनगोपाल के पास तो फूटी कौड़ी भी नहीं थी। उसने काकाजी से गिड़गिड़ाते हुए कहा, आप इनकी गाड़ी में जितना चाहे पैट्रोल भरवा दीजिए, मैं आपके हाथ जोड़ता हूँ, सारा पैसा चुका दूंगा। काकाजी ने उस गाड़ी में सौ रुपया का पैट्रोल भरवा दिया।
अब वे थाने पहुंच चुके थे। थाने में दूसरा संतरी बैठा हुआ था। उसने बड़े इत्मिनान से कहा, चिन्ता नहीं करें, बच्चे सकुशल हैं। आप दो सौ रुपये निकालिये, मैं पूरा एड्रेस बता देता हूँ। मदनगोपाल ने काकाजी को इशारा किया, उन्होंने डेढ सौ रुपये टेबुल पर रख दिये। सिपाही ने रुपये जेब में रखते हुए कहा, बच्चे जयपुर बजाज नगर थाने में हैं। बिस्किट खा रहे हैं। घबराने की कोई बात नहीं है। सिपाही ने एक पर्ची पर नम्बर लिखकर देते हुए कहा, किसी तरह की कोई समस्या हो तो मेरे इन नम्बरों पर फोन कर देना।
दूसरे दिन सुनिल को साथ लेकर स्कूल बैग की तलाशी की गई। पंचायत समिति के पीछे पेड़ की ओट में दोनों के बैग सुरक्षित मिल गए थे। आज रविवार था। रवि की रश्मियां पूर्ण कांति से प्रकाशमान थी। कुँहासे के बादल छंट चुके थे। ग्रहयोग टल चुका था।
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